काश !मैं तुमसे बचपन में मिल पाता,
साथ तेरे मैं स्कूल जाता,
तू मेरे संग खेला करती,
और मैं तुमको खूब सताता
काश !......
साथ तेरे मैं स्कूल जाता,
तू मेरे संग खेला करती,
और मैं तुमको खूब सताता
काश !......
स्कूल में छीनकर तेरी टॉफियाँ खाता,
बारिश में अपनी छतरी दे देता
झूमता भीगता मैं घर को जाता
जुकाम होने पर माँ की डांट खाता
काश !.....
बारिश में अपनी छतरी दे देता
झूमता भीगता मैं घर को जाता
जुकाम होने पर माँ की डांट खाता
काश !.....
रविवार की स्कूल बंदी जब होती
अपनी नन्ही साइकिल पर तुम्हें गाँव घुमाता
बूढ़े बरगद की छल्लों के झूले झुलाता
लाला के खेत से तेरे लिए गन्ने चुराता
काश! ......
अपनी नन्ही साइकिल पर तुम्हें गाँव घुमाता
बूढ़े बरगद की छल्लों के झूले झुलाता
लाला के खेत से तेरे लिए गन्ने चुराता
काश! ......
एक दिन जब तेरी रंगीन ग़ुम जाती
चित्रकला मैम की डर तुम्हें सताती
मैं रंगीन को बनाने खातिर
फूल पत्तों का अंबार लगाता
अपने स्तर का विज्ञान लगाता
चित्रकला मैम की डर तुम्हें सताती
मैं रंगीन को बनाने खातिर
फूल पत्तों का अंबार लगाता
अपने स्तर का विज्ञान लगाता
काश ! .....
जब तुम मुझको मिलने बुलाती
खेल छोड़ मैं दौड़ा आता
ना पापा का डर सताता
ना मम्मी का बहाना होता
खेल छोड़ मैं दौड़ा आता
ना पापा का डर सताता
ना मम्मी का बहाना होता
ऊंच-नीच का भेद न होता
जाति-पाति का खेद न होता
रोने की कोई वजह न होती
बस हंसने का बहाना होता
काश!.....
जाति-पाति का खेद न होता
रोने की कोई वजह न होती
बस हंसने का बहाना होता
काश!.....
गुड्डे-गुड़िया का खेल जो होता
संग तेरे मैं ब्याह रचाता
सिसकती दुल्हन मेरे घर आती
और मैं तुमको खूब मनाता
संग तेरे मैं ब्याह रचाता
सिसकती दुल्हन मेरे घर आती
और मैं तुमको खूब मनाता
काश! वो बचपन कभी ना जाता।
काश!काश! काश!
काश!काश! काश!

Beautiful poem. Great start. Keep writing.
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