जब कभी गुजरा जमाना याद आता है,
स्कूल की मस्ती और नवोदय याद आता है|
वो पीटी सर की सीटी रोज बजती हमें जगाने को
वो एक सर से रोज डांट खाना याद आता है |
वो एसएसटी की घंटी में अपने फंडे देना,
वो म्यूजिक क्लासेस, वो हारमोनियम बजाना ,
जरा सी बात पर क्लास में हँसना-हँसाना याद आता है |
जब कभी .....................
वो बोर्ड पर लिखना, वो चाक से खेलना ,
हमेशा दूसरी प्राणियों पर कमेन्ट करना ,
सेक्शन-बी के पहली बेंच पर बैठी उसका मुस्कुराना याद आता है !
जब कभी....................
शनिवार का सीसीए, शिवालिक हाउस का जीतना,
ऐसे में किसी का वहीँ रो देना याद आता है ,
जब कभी....................
वो एवेनिंग गेम्स, फिर स्नेक्स बंटना,
वो खाने को लड़ना, वो लाइन में लगना,
भोजन मंत्र के बाद सब भूल जाना याद आता है |
जब कभी ..................
वो नाईट अत्तेंदेंस, वो मच्छरदानी लगाना,
फिर नई सुबह के लिए सो जाना याद आता है |
जब कभी गुजरा जमाना याद आता है...
अपना बचपन, अपने दोस्त, अपना नवोदय सब याद आता है |
जब कभी .....
Memory is a way of holding onto the things you love, the things you are, the things you never want to lose. ~From the television show " The Wonder Years "
स्कूल की मस्ती और नवोदय याद आता है|
वो पीटी सर की सीटी रोज बजती हमें जगाने को
वो एक सर से रोज डांट खाना याद आता है |
वो एसएसटी की घंटी में अपने फंडे देना,
वो म्यूजिक क्लासेस, वो हारमोनियम बजाना ,
जरा सी बात पर क्लास में हँसना-हँसाना याद आता है |
जब कभी .....................
वो बोर्ड पर लिखना, वो चाक से खेलना ,
हमेशा दूसरी प्राणियों पर कमेन्ट करना ,
सेक्शन-बी के पहली बेंच पर बैठी उसका मुस्कुराना याद आता है !
जब कभी....................
शनिवार का सीसीए, शिवालिक हाउस का जीतना,
ऐसे में किसी का वहीँ रो देना याद आता है ,
जब कभी....................
वो एवेनिंग गेम्स, फिर स्नेक्स बंटना,
वो खाने को लड़ना, वो लाइन में लगना,
भोजन मंत्र के बाद सब भूल जाना याद आता है |
जब कभी ..................
वो नाईट अत्तेंदेंस, वो मच्छरदानी लगाना,
फिर नई सुबह के लिए सो जाना याद आता है |
जब कभी गुजरा जमाना याद आता है...
अपना बचपन, अपने दोस्त, अपना नवोदय सब याद आता है |
जब कभी .....
Memory is a way of holding onto the things you love, the things you are, the things you never want to lose. ~From the television show " The Wonder Years "

nice one bhaiya.....par ap to nilgiri me the....shivalik ka barai kyun kar rahe hain?
ReplyDeletearey yaar Kishanganj me Shivalik House me tha;so likhte samay feel aa gayi.
ReplyDeletebhaiya, ye to heart ko touch kar gaya
ReplyDeleteWahi to maine socha ki ye kavita to meine pahle bhi kahin padi hai, Are author to apna Kanchan hai [:)], Mujhe us wakt bhi bahut pyari lagi thi aur aaj bhi lagti hai
ReplyDeleteabe tune likha ye, Kanchu darling!!
ReplyDeleteGreat yeaar. I liked it..
Waise Shivalik house is always great, hum hamesha Jeet-te the !!!
Waah....section b ki pahli bench....bahut badhiya likha bhai....
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